धुन का पक्का विक्रमार्क पुनः पेड़ के पास गया, पेड़ पर से शव को उतारा और अपने कंधे पर डाल लिया। फिर यथावत् श्मशान की ओर बढ़ता हुआ जाने लगा। तब शव के अंदर के वेताल ने कहा, ‘‘राजन्, लगता है कि तुमने किसी मांत्रिक का अपमान किया और उसने क्रोधित होकर तुम्हें शाप दिया, जिसके कारण यों आधी रात को श्मशान में नाना प्रकार के कष्ट झेल रहे हो। संन्यासी और बैरागी गृहस्थों के घर अतिथि बनकर आते हैं। उनमें से कुछ मंत्र-तंत्रों में माहिर होते हैं। गौरव नामक एक युवक यह जानने में असफल हुआ, जिसकी वजह से वह शाप-ग्रस्त हुआ। बैरागी के दिये शाप के कारण उसे बहुत-से कष्टों से होते हुए गुज़रना पड़ा। थकावट दूर करते हुए उसकी कहानी सुनो।'' फिर वेताल ने उसकी कहानी यों सुनायीः |
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