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कहानियाँ

राजकुमारी के प्रश्न

लेखक: चन्दामामा | 8th Jan, 2010


 

धुन का पक्का विक्रमार्क पुनः पेड़ के पास गया, पेड पर से शव को उतारा और उसे कंधे पर ड़ाल लिया। फिर यथावत् श्मशान की ओर बढ़ता हुआ जाने लगा। तब शव के अंदर के वेताल ने कहा, ‘‘राजन् , हम देखते रहते हैं कि कुछ विद्यावानों में विवेक, विनम्रता भरे हुए होते हैं। वे अपने ज्ञान को दूसरों के साथ बांटते भी हैं। पर, कुछ ऐसे विद्यावान भी हैं, जो इससे बिल्कुल भिन्न हैं। अपने विद्यावान होने का दर्प उनमें भरा हुआ होता है। अपने शब्दों के मायाजाल से, वे दूसरों की अवहेलना करते हैं, उन्हें अपमानित करते हैं। मुझे शंका हो रही है कि कहीं ऐसे व्यक्तियों ने तुम्हें इस असाध्य कार्य को पूरा करने के लिए प्रेरित तो नहीं किया? मैं तहेदिल से चाहता हूँ कि तुम उनके स्वभाव-स्वरूप को जानो। मैं ऐसी ही दुरहंकारी राजकुमारी विलासिता की कहानी तुम्हें बताऊँगा, जिसमें अपने विद्यावान होने का गर्व कूटकूट कर भरा हुआ था । थकावट दूर करते हुए ध्यानपूर्वक सुनना।’’ फिर वेताल कहानी यों सुनाने लगाः


भूपतिसेन माल्य देश का राजा था। विलासिता उसकी इकलौती पुत्री थी। राजा ने, एक महापंडित को उसे समस्त विद्याएँ सिखाने के लिए नियुक्त किया। विवाह के योग्य होने तक उसने सभी विद्याएँ सीख लीं। गुरु ने भॉंप लिया कि विद्या के साथ-साथ उसमें अहंभाव की मात्रा भी बढ़ी है। इसलिए राजा और रानी को उसने सलाह दी कि वर को चुनने का अधिकार उसे ही दिया जाए और इस विषय में उसे पूरी आज़ादी दी जाए।


विद्या में ही नहीं, बल्कि सौंदर्य में भी विद्युत लता की तरह चमकनेवाली विलासिता से विवाह रचाने कई राजकुमार आगे आये। वर के चयन में उसकी विचारधारा बहुत हद तक विलक्षण थी। वह चाहती थी कि उससे विवाह करनेवाला सब क्षेत्रों में उसके समान हो। यह उसका निश्चित अभिप्राय था।


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