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कहानियाँ

देवी भागवत - 2

लेखक: चन्दामामा | 17th Jun, 2009


 
सूत बताने लगे कि ब्रह्मा की प्रार्थना के अनुसार योगनिद्रा के चले जाने के बाद विष्णु नींद से जागे। उनके इस कथन पर मुनियों ने आपत्ति उठायी और कहने लगे ‘‘हमने सुना था कि ब्रह्मा, विष्णु, महेश्वर सृष्टि की स्थिति के कारक हैं। हमने यह भी सुना कि इन तीनों में से विष्णु सर्वोत्तम हैं। ऐसे विष्णु जब योगनिद्रा में सुसुप्त हैं, तब उनकी शक्ति व तेजस्विता का क्या हुआ? आदिशक्ति को इनसे बढ़कर शक्ति कहाँ से मिल गयी? हमने सुना कि विष्णु ही समस्त कारणों के कारक हैं। पर तुम तो बता रहे हो कि आदिशक्ति ही समस्त कारणों का मूल हैं। हम समझ नहीं पा रहे हैं कि सच क्या है?''
 
सूत ने यों कहा :
 
‘‘मुनिगण, आपके प्रश्न का उत्तर ध्यान से सुनियेगा। नारद आदि महामुनियों ने भी आदिशक्ति के अपार प्रभाव को समझ न सकने के कारण विष्णु को ही सर्वशक्तिमान समझा। परंतु यह केवल उनका भ्रम मात्र था। इसी प्रकार औरों के बारे में भी भिन्न-भिन्न अभिप्राय रहे। किसी ने शिव को भगवान माना तो किसी ने सूर्य को। किसी ने अग्नि को वह स्थान दिया तो किसी ने चन्द्र को। वे अपने-अपने भ्रम से बाहर नहीं आ सके। चाहे कोई कैसा भी प्रमाण प्रस्तुत क्यों न करे, पर सच तो यह है कि अनंततः आदिशक्ति ही सच्ची शक्ति है। यह शक्ति विष्णु में, शिव में, सूर्य में, वायु में, अग्नि में दिखायी पड़ती है।''
 
ऐसी शक्ति से जगाये गये विष्णु ने ब्रह्मा को देखकर कहा, ‘‘पुत्र, तपस्या छोड़कर यहाँ क्यों आये? तुम्हारी चिंता का क्या कारण है?''
 
‘‘अब मैं तपस्या कैसे कर पाऊँगा। यह कैसे संभव होगा? तुम्हारे दो कानों से मधुकैटभ नायक दो राक्षस जन्मे हैं और मुझे मार डालने की धमकी दे रहे हैं। वे युद्ध करने ललकार रहे हैं।'' ब्रह्मा ने कहा।

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